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जेंडर हिंसा के खिलाफ 16 दिवसीय अभियान , दसवें दिन री-थिंक  कार्यशाला

जेंडर हिंसा के खिलाफ 16 दिवसीय अभियान के तहत सामाजिक संस्था यूथ यूनिटी फॉर वॉलंटरी एक्शन युवा की ओर से आज दसवें दिन बुलेवर्ड होटल बिष्टुपुर में री थिंक  कार्यशाला
जेंडर हिंसा के खिलाफ 16 दिवसीय अभियान के तहत सामाजिक संस्था यूथ यूनिटी फॉर वॉलंटरी एक्शन युवा की ओर से आज दसवें दिन बुलेवर्ड होटल बिष्टुपुर में री-थिंक  कार्यशाला

थैलेसीमिया पीड़ितों को भी मिले आरक्षण

सभी सरकारी और निजी संस्थानों में हो रैंप की व्यवस्था

विकलांग लोगों  से संबंधित आंकड़ा और सुविधाएं प्रमुख जगहों पर प्रदर्शित हो

जमशेदपुर, 4 दिसंबर: जेंडर हिंसा के खिलाफ 16 दिवसीय अभियान के तहत सामाजिक संस्था यूथ यूनिटी फॉर वॉलंटरी एक्शन युवा की ओर से आज दसवें दिन बुलेवर्ड होटल बिष्टुपुर में री थिंक  कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय मुझे नहीं मेरे अधिकारों को सुरक्षित करो नजरिया बदलो था। कार्यशाला में काफी संख्या में विकलांग महिलाओं ने भाग लिया कार्यशाला के मुख्य अतिथि समाजसेवी बेली बोधनवाला थे।

युवा की सचिव वर्णाली चक्रवर्ती ने कहा कि महिलाओं के लिए तय किए गये सुरक्षा नियमों के बारे में फिर से सोचने की ज़रुरत है ।महिलाओं को सुरक्षित करने के नाम पर महिलाओं को उनके ही अधिकार से वंचित किया जाता हैं।

 आज के re - think कार्यक्रम में वर्णाली चक्रवर्ती  ने सभी अतिथियों का परिचय कराते  हुए  कार्यक्रम के  उद्देश को बताई अब तक महिलाओं के लिए जो भी नियम कर्तव्य कानून बने हैं उन्हें ने नए तरीके से सोचना ताकि हर साथी महिला को अधिकार मिल सके और वह क्षेत्र में सुरक्षित रहे आज यह सवाल है कि जो सिस्टम बनी हुई है उन खामियों को कौन उठाएगा ।

बेली बोधनवाला  ने बताया कि महिलाएं घर की पत्नी-मां-बहन होती है मगर हर कदम पर वो अकेली पढ जाती है पत्नी को मारेंगे तो क्या होगा, समान्य महिला के साथ भी हिंसा होती है आज घर में बच्चों को शिक्षा दे  समझायें  कि हर लड़की या महिला के साथ समानता का व्यवहार करे ।

नरेंद्र प्रसाद सिंह सचिव झारखंड विकलांग मंच RPD Act  के बारे में विस्तृत जानकारी दी संविधान में सबको अधिकार है ST,SC Act एवं विकलांग के लिए भी कानून बने हैं 1995  PWD Act के तहत सात प्रकार के विकलांगता कि प्रकार को उजागर किया गया था लेकिन उन में भी कुछ कमियां थी इसके लिए सभी देशो ने मिलकर काम किया और 2016 में कुछ बदलाव किया गया जिसमें  21 प्रकार के विकलांगों को त्रेणियो में रखा गया। 92 सेक्शन के अंतर्गत विकलांग व्यक्ति  को अधिकार पाने का अधिकार है किसी भी तरह के सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने का अधिकार है ।

विकलांग व्यक्ति निशुल्क शिक्षा ले सकते हैं जिसके लिए उन्हें प्रतिमाह 50/-, 250/- वर्ग के  हिसाब से मिलने का प्रावधान है । पैनल डिस्कशन किया गया जिसका संचालन विकलांग मंच के अध्यक्ष अरुण जी ने किया इस पैनल में हेमंती महतो सुमन ओड़िया (आंगनबाड़ी सुपरवाइजर पटमदा ) मीना जी( विकलांग मंच की कानूनी सलाहकार) डॉ विजय, डॉo विश्वेश्वर  , नीतू कुमारी कुंती कुमारी (मिस झारखंड विकलांग) शामिल हुए और डिस्कशन का विषय था विकलांग महिलाओं के साथ भेदभाव एवं हिंसा के स्तर की पहचान जिसमें सभी ने अपने अपने अनुभव और चुनौतियों को साझा किया। जिसमें  विकलांग महिला और लड़कियों के बहुत सारे मुद्दे निकलकर आए - विकलांग महिला के साथ शोषण।

महिलाएं सरकारी योजना तक पहुंच नहीं पा रही है उन्हें नेतृत्व करने का मौका नहीं मिल रहा है समाज में स्वीकृति नहीं मिल रही है नौकरी के क्षेत्र में उनके लिए कोई आरक्षण नहीं है कई सार्वजनिक एक स्थानों पर उनके लिए शौचालय और आने जाने की सुविधा उपलब्ध नहीं है क्यों आज विकलांग लोगों से कोई शादी नहीं करना चाहता। कितने घरों में तो आज भी विकलांग महिलाओं को छुपा कर रखा जाता है कोई महिला अगर आवाज उठाती है तो उनकी हत्या कर दी जा रही है ।

नीतू कुमारी जो कि स्वयं  थिलेसिमिया पेसेंट है उन्होंने बताया कि यह भी एक प्रकार की विकलांगता है लेकिन इसे भी किसी क्षेत्र में स्वीकृति नहीं मिली है जिस कारण से वह किसी नौकरी का आवेदन नहीं भर सकते। कुंती जी ने कहा कि सच में आज समाज में नए नज़रिये की जरुरत है जानकारी के अभाव के कारण कई विकलांग लोग अवसर उस से वंचित हो जाते हैं आज सरकारी स्कूलों में उन्हें भी प्रतिभाग करने का मौका मिले ताकि वह अपनी कला को दिखा पाए और आगे बढ़े।

मीना जी ने कहा ची दोहरी मार विकलांग महिला को पड़ता है गरीबी का और विकलांगता का, क्यों विकलांग महिला के पास काबिलियत होने के बाद भी स्कूलों में नौकरी नहीं मिलती उन्हें भी कम से कम स्कूल में बच्चों को पढ़ाने का आरक्षण मिले। यादव जी ने कहा कि अधिकार तो है लेकिन उन्हें सुरक्षित करने का काम कौन करेगा भारतीय सभ्यता की प्रचलन में आज महिलाएं बंद कर दब कर रही है सोच बदलने की आवश्यकता है कदम उठाना होगा किसी विकलांग के हाथ को थाम कर। आने वाले चुनाव में विकलांग महिलाएं जरूर शामिल हो ताकि समाज में आगे आकर अपने मुद्दों को भी आगे तक ले जाए।

डिस्कशन के दौरान कई सवाल भी उठे क्या विकलांग महिला निशुल्क अपने साथ वह हिंसा के विरूद्ध केस लड़ सकती है? निशुल्क  शिक्षा का लाभ उठाने का क्या प्रावधान है? CREA की प्रोग्राम मैनेजर बबिता सिन्हा  ने 16 दिवसीय  अभियान के उद्देश को बताया कि कि किस तरह समुदाय में  महिलाओं लड़कियों विकलांगता से जी रहे महिलाओं के लिए अपने अधिकार को मजबूत करने का और एक सुरक्षित वातावरण बनाने का प्रयास कर रहा है ताकि महिलाएं अपनी आवाज को उठा सके और अपनी बातों को रख सके ।क्यों हम विकलांगता को गिनना नहीं चाहते आज जितना सुरक्षा के घेरे बनाएंगे उतने ही हिंसा होंगे इसलिए महिलाओं के अधिकार उनको सुरक्षित करें। युवा संस्था के कोषाध्यक्ष नरेंद्र जी धन्यवाद ज्ञापन कर कार्यक्रम के समापन के घोषणा की ।

 

इस कार्यक्रम में, महिला कल्याण समिति  की सचिव " अंजली बोस ", आदर्श सेवा संस्थान की सचिव " प्रभा जायसवाल ""लकी दास" ,  ,लायंस क्लब से "पूर्वी घोष" रंगकर्मी छवि दास और युवा  की अध्यक्ष उषा सबीना देवगम कोषाध्यक्ष नरेंद्र कुमार बोर्ड मेंबर नीता बोस मधुमिता बनर्जी बंगबंधु संस्था की अपर्णा गुहा मुख्य रूप से उपस्थित थे ।  

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